पचरंगा अचार की शीशे वाली याद
जयपुर के कई घरों में पचरंगा अचार बस अचार नहीं, पूरे साल का साथ है। रसोई के कोने में शीशे के बर्तन लगे रहते हैं — कच्चा आम, नींबू, गाजर, हरी मिर्च और कभी-कभी गोभी भी। गर्मियों में इन बर्तनों को छत या आँगन की धूप में रखना एक छोटा सा नियम होता है। म्हारे यहाँ दादी बोलती थी, “धूप बिना अचार अधूरा।” सरसों के तेल की तीखी खुशबू, मेथी के दाने और राई का दाना मिलकर वह रंग बनाते हैं जो जयपुर के घर को पहचान देता है। हर बार डिब्बा खुलता है, तो लगता है जैसे गर्मी का एक पुराना टुकड़ा वापस आ गया। और सच्ची, इसी में घर की याद भी मसालेदार हो जाती है।
