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पंचायत चुनाव की तैयारी में आरक्षण का हिसाब

Panchayat poll ki taiyari mein reservation ka hisaab

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में फाइलों की सरसराहट बढ़ गई है। आरक्षण का हिसाब लगाना कोई छोटा काम नहीं होता — गाँव की सीट, वार्ड का नक्शा और नियम सब एक साथ देखने पड़ते हैं। इसी लिए कलेक्टरों और एसडीएम को अलग जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, ताकि तैयारी में कोई उलझन न रहे। गाँव के लोग भी इस प्रक्रिया को ध्यान से देखते हैं, क्योंकि एक सीट का आरक्षण बदलने से पूरी स्थानीय राजनीति का रुख बदल सकता है। कोई कह रहा है, अब हमारे इलाके की बारी आएगी; कोई बोल रहा है, पहले हिसाब तो सही बैठने दो। यही तो पंचायत की असली बात है — छोटा सा प्रशासनिक कदम, पर असर घणो बड़ा। अब अगला सवाल यह है कि आरक्षण का अंतिम रूप कब तक सामने आता है।