पंचायती राज वार्ड लॉटरी देरी पर HC का रुख
पंचायती राज संस्थाओं में वार्ड आरक्षण लॉटरी का काम अभी तक आगे नहीं बढ़ा है, और इसी देरी पर सवाल उठ रहे हैं। यही वह चरण होता है जहाँ वार्डों की गिनती, श्रेणी का हिसाब और आगे की चुनावी तैयारी का रास्ता साफ होता है। जब यह पहला कदम ही रुक जाए, तो पूरी प्रशासनिक समय-सीमा खिंचती चली जाती है। इसी पृष्ठभूमि में अवमानना याचिका दायर करने की बात आई है, क्योंकि स्थगन को न्यायालय के पहले से दिए गए निर्देश के खिलाफ माना जा रहा है। सीधी बात यह है: लॉटरी सिर्फ कागजी काम नहीं, बल्कि स्थानीय चुनावी प्रक्रिया का आधार है। जयपुर से लेकर गाँव तक, लोग इसी हिसाब से आगे की तैयारी देखते हैं। एक छोटा-सा प्रशासनिक विलंब, कभी-कभी पूरे तंत्र को घुमा देता है। अब नज़र इस बात पर है कि उच्च न्यायालय इस देरी को कैसे देखता है।
