पंचना बांध के पानी पर 20 दिन की खिंच-तान खत्म
पंचना बांध से सिंचाई के पानी की माँग को लेकर जो 20 दिन से चल रहा था, वह आंदोलन अब आश्वासन मिलने के बाद थम गया। यह मामला सीधे खेत से जुड़ा है, इसलिए बात सिर्फ एक माँग की नहीं, बल्कि आने वाली फसल की योजना की भी थी। गाँव के लोगों के लिए पानी का मतलब कैलेंडर, मेहनत और उम्मीद—सब एक साथ होता है। स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ी बात यही रही कि बातचीत के बाद पानी छोड़ने का भरोसा दिया गया। ऐसे मौकों पर एक ही पंक्ति का असर पूरे इलाके में दिख जाता है—अब देखते हैं पानी समय पर पहुँचता है या नहीं। किसानों की नज़र अब इस पर रहेगी कि आश्वासन कागज़ से निकल कर नाले और नाली तक कितनी जल्दी पहुँचता है। घणी सच्ची बात यही है: खेत को बहस नहीं, पानी चाहिए।
