पंचना डैम पर 20 साल बाद फिर बात
पंचना डैम का विवाद नया नहीं है, बस इस बार उसकी आवाज़ फिर से जयपुर तक आ पहुँची है। एक तरफ इलाका है जहाँ पानी की कमी रोज की बात है, और दूसरी तरफ वह रिज़रवॉयर है जहाँ पानी मौजूद है। इसी उलझन ने 20 साल पुरानी याद फिर ताज़ा कर दी है. जयपुर में जो बात उठी, उसका सीधा सा मतलब यही था कि बिना सब स्टेकहोल्डर को सुने हल निकालना मुश्किल है। यानी किसान, लोकल समुदाय, अधिकारी और प्लानिंग से जुड़े लोग — सबकी बात एक टेबल पर आनी चाहिए। वरना हर बार सेम चक्कर: पानी है तो किस का, कैसे बचेगा, और कैसे बहेगा. सच्ची बात ये है कि राजस्थान में पानी का मामला सिर्फ इंजीनियरिंग का नहीं, ज़िंदगी का भी है। इसलिए इस डिस्प्यूट पर जो सबसे बड़ी बात बनी, वह थी डायलॉग की ज़रूरत। अब देखना यह है कि बात कागज़ पर रहती है या ज़मीन पर भी कोई रास्ता निकलता है.
