पन्ना मीना का कुंड: धूप की ज्यामिति
पन्ना मीना का कुंड की दोपहर में सबसे पहले नज़र सीढ़ियों पर जाती है। एक ही कुंड में इतनी सारी तिरछी रेखाएँ, इतना सीधा-झुका हुआ नक़्शा, और इतनी गहरी छाया — सच्ची, जयपुर की धूप को यह जगह लगभग रोक देती है। ऊपर से नीचे तक उतरती सी सीढ़ियाँ देखकर लगता है जैसे ज्यामिति ने आराम का घर बना दिया हो। नीचे बैठा परिवार, कोई फोटो ले रहा, कोई बस पानी की तरफ देख रहा। खास बात यह है कि यहाँ शोर कम और साँस ज़्यादा सुनाई देती है। आमेर के पास का यह कुंड सिर्फ देखने की जगह नहीं, ठहरने की जगह है। घणी गर्मी में भी इसकी छाया का हिसाब एकदम सही बैठता है, भाया।
