पन्ना मीना का कुंड: ज्यामिति का जादू
आमेर किले के पास वाली गली से थोड़ा अंदर जाओ, तो पन्ना मीना का कुंड मिलता है — एक सीढ़ीदार कुआँ जो देखते ही आँख को पकड़ लेता है। इसकी सीढ़ियाँ बिलकुल तालमेल में बनी हैं; हर कोना, हर रेखा एक जैसी लगती है। धूप में पत्थर गरम होता है, पर नीचे उतरते ही हवा ठंडी हो जाती है। यहीं पर जयपुर की असली धीमी साँस मिलती है। लोग इस जगह पर बस तस्वीर के लिए नहीं, थोड़ी देर बैठने के लिए आते हैं। आमेर और जयगढ़ की भाग-दौड़ के बीच यह एक छोटा सा विराम है। घणी सच्ची बात: 12 लोगों का चुप हो जाना इसी सुकून का निशान था। कोई फ़ोन नीचे, कोई नज़र सीढ़ियों पर — और सबको लगा, जयपुर का ज्यामिति वाला जादू यहीं छुपा है।
