पन्ना मीना का कुंड: जयपुर की ज्यामिति
पन्ना मीना का कुंड आमेर के पास वह जगह है जहाँ पत्थर सीधा नहीं, सोच समझ कर रखा गया लगता है। नीचे उतरती हुई एक जैसी सीढ़ियाँ, सामने का खुला तालाब, और धूप में बनती तेज रेखाएँ — सब मिलकर एक अलग ही दृश्य बनाते हैं। सुबह या शाम आओ, तो ठंडी हवा और छाया का खेल और साफ दिखता है। यह कुंड सिर्फ पानी का ठिकाना नहीं था; यहाँ लोग रुकते, मिलते और आराम करते थे। इसकी ज्यामिति देखकर राजस्थान की कारीगरी याद आती है — सीधी, साफ, और दिमाग से बनी हुई। पन्ना मीना का कुंड के एक कोने में जो छोटी सी छत का किनारा है, वही उसका राज़ है: उस पर बैठकर पूरा कुंड एक फ्रेम जैसा लगता है। घणी सही जगह है, पधारो और धीरे से देखो.
