पन्ना मीना का कुण्ड: जयपुर की ठंडी ज्यामिति
पन्ना मीना का कुण्ड देखकर लगता है जयपुर ने अपनी धूप का जवाब सीढ़ियों में लिख दिया हो। चौखट जैसी खुली जगह, बराबर कटती सीढ़ियाँ, और नीचे तक उतरता ठंडा सा खयाल — सब मिलकर ऐसी जगह बनाते हैं जहाँ बात कम, साँस ज़्यादा चलती है। सुबह या शाम, यहाँ लोग फोटो के साथ थोड़ी देर का सुकून भी लेते हैं। पानी अब कम हो सकता है, पर उसकी याद अब भी दीवार पर टिकी है। पधारो वाले इस शहर में ऐसे कुण्ड बस पुरानी इमारत नहीं, मिलने की आदत हैं। घणी देर तक धूप से बचने का जयपुरिया तरीका, सच्ची, अब भी यही है.
