पन्ना मीना का कुण्ड की सीढ़ियाँ
आमेर के रास्ते पर पन्ना मीना का कुण्ड ऐसा नज़ारा है, जो नज़र से छूट नहीं सकता। यहाँ सीढ़ियाँ एक-दूसरे को काटती, मिलती और फिर मुड़ती हुई एक खास बनावट बनाती हैं। धूप तेज हो तो भी नीचे की हवा ठंडी लगती है, और पत्थर पर पैर रखते ही चलना धीमा हो जाता है। म्हारे जयपुर में कभी-कभी सुंदरता जल्दी नहीं, रुक-रुक कर समझ आती है। यहाँ की 200 से ज़्यादा सीढ़ियाँ सिर्फ गिनती नहीं, एक अनुभव हैं। लोग फोटो के लिए आते हैं, पर कुछ देर बाद बस दीवार और पानी की आवाज़ सुनते रह जाते हैं। यही इस कुण्ड की असली बात है: यह आपको रुकना सिखाता है, और रुकने में भी एक सुकून दिखाता है।
