पन्ना मीना का कुण्ड की धारीदार समरूपता
पन्ना मीना का कुण्ड जयपुर के आमेर वाले हिस्से में छुपा वह कोना है जहाँ नज़र रुक जाती है। यहाँ की सीढ़ियाँ एक-दूसरे से ऐसे मिलती हैं कि धारीदार समरूपता खुद एक कला लगती है। सुबह की नरम धूप में पत्थर पर हल्की चमक आती है, और नीचे उतरते ही हवा का ठंडा झोंका अलग ही सुकून देता है। यह सिर्फ़ देखने की जगह नहीं, समझने की भी जगह है — पानी सँभालने का पुराना तरीका, और साथ ही एक सुंदर बनावट। स्थानीय लोग आज भी इसकी पहचान प्यार से करते हैं। घणी देर यहाँ खड़े रहो तो लगता है, जयपुर ने अपनी छत की दीवार पर एक गणित का गीत लिख दिया हो। और सच्ची, 350 से ज़्यादा सीढ़ियाँ देखकर भाईसाब बस एक ही बात बोलता है: वाह।
