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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

पन्ना मीना का कुंड: सीढ़ियाँ, सन्नाटा और जयपुर

Panna Meena ka Kund: seedhiyan, sannaata aur Jaipur

पन्ना मीना का कुंड पर उतरते ही शोर धीमा हो जाता है। एक तरफ सीढ़ियाँ एकदम सीधी नज़र आती हैं, दूसरी तरफ कोने ऐसे कि आवाज़ भी पलट कर आती लगे। गर्मी में यह जगह सूखे पत्ते जैसी नहीं, छाया जैसी लगती है। स्कूल के बच्चे यहीं रुक कर हँस देते हैं, और फ़ोटोग्राफ़र हर एक कोना नापते रहते हैं। पधारो, जयपुर का यह पुराना पानी वाला हिसाब बस खूबसूरती नहीं था; लोग यहीं मिलते, रुकते, और पानी सँभालते थे। अब यहाँ पानी कम, पर याद ज़्यादा है। घणी देर तक खड़े रहने का मन भी इसी लिए करता है।