पे कमीशन का हिसाब अभी भी पेंडिंग है
8वें केंद्रीय वेतन आयोग का काम काफी आगे बढ़ चुका है, पर अंतिम रिपोर्ट अभी सरकार के पास नहीं पहुँची है। आयोग ने कर्मचारी संगठनों, पेंशनर समूहों और सेवा संघों से क्षेत्रीय बैठकों में उनकी बात सुनी है। दिल्ली परामर्श सोमवार को खत्म हुए, और अब जयपुर की बारी भी आने वाली है। असल सवाल वही है जो हर वेतन वाली चाय पर उठता है: फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, न्यूनतम वेतन का हिसाब क्या बनेगा, और भत्तों में क्या बदलाव आएगा। संगठनों ने आधुनिक खर्चों का मुद्दा उठाया है — इंटरनेट बिल, पानी, चिकित्सा बीमा, सब का बोझ आज अलग है। आयोग ने मंत्रालय और विभागों से कर्मचारी आँकड़े भी मँगाए थे, ताकि संशोधन का खर्च समझा जा सके। अब सबकी नजर उस रिपोर्ट पर है जो अभी तक मेज पर नहीं आई है।
