लंबित मामलों पर CM का नया जोर
जयपुर में लंबित मामलों को जल्दी समाप्त करने का नया निर्देश आया है, और उसके साथ एक सीधी-सी बात भी: देरी क्यों हुई, यह भी लिखो। अंत्योदय की सोच से जुड़ी इस पहल में संदेश साफ़ है — फ़ाइल सिर्फ़ चलनी नहीं चाहिए, उसका हिसाब भी रहना चाहिए। कार्यालय की भागदौड़ में ऐसी बात का मतलब सीधा है: अभिलेख और जवाबदेही दोनों पर ध्यान। कई बार मामला सिर्फ़ इसलिए अटक जाता है क्योंकि कारण लिखा ही नहीं होता, और फिर वही फ़ाइल कैलेंडर बदलती रहती है। जयपुर के कामकाजी लोग इसे एक नई नज़दीकी नज़र की तरह देख रहे हैं — व्यवस्था को तेज़ भी होना है और साफ़ भी। सच्ची बात यही है: फ़ाइल का सफ़र तभी सीधा होता है जब देरी का निशान भी लिखा हो। और उसी निशान से अगला हिसाब बनता है।
