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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

पोथीखाना की खामोश कागज़ी दुनिया

Pothikhana ki khamosh paper duniya

पोथीखाना जयपुर के उन कमरों में से है जहाँ कागज़ सिर्फ कागज़ नहीं, याद का सबूत बन जाता है। यहाँ पुरानी पोथियाँ, फ़रमान, नकल और हिसाबी पन्ने ध्यान से रखे जाते हैं, ताकि राजपूताना के ज़माने की लिखत खोई न हो। दीवार के पास रखी अलमारियों में धूल कम, ख़ामोशी ज़्यादा मिलती है। इस जगह की असली ख़ूबसूरती वही रेखाएँ हैं जो सीधी नहीं, पर बहुत कुछ कह जाती हैं। एक पुराने पन्ने पर 17 मुहरों की गिनती मिलना इसी का संकेत है—कि एक छोटा सा कागज़ भी कितनी लंबी सरकारी या घरैली कहानी सँभाले हुए था। म्हारे जयपुर में ऐसी जगह पर समय तेज़ नहीं, धीरे पलटता है।