रेलवे का AI अब लिनन के दाग पकड़ेगा
भारतीय रेलवे ने पुणे, जयपुर और जोधपुर मंडलों में AI-आधारित दाग पहचान का पायलट शुरू किया है। सीधी बात: एसी श्रेणी के यात्रियों को जो चादर, तकिए का खोल और दूसरा लिनन मिलता है, उसकी गुणवत्ता अब सिर्फ आंखों से नहीं, मशीन से भी जाँची जाएगी। इसका मतलब यह है कि धुलाई के बाद भी जो दाग बचे रह जाते हैं, उन्हें पहचानने में नया सिस्टम मदद करेगा। रेलवे का ध्यान साफ है — लिनन ज्यादा स्वच्छ हो, और शिकायतें कम आएँ। जयपुर जैसे बड़े मंडल में, जहाँ रोज़ काफी एसी यातायात रहता है, ऐसी जाँच का असर सीधे सफर पर पड़ता है। म्हारे हिसाब से यह छोटा लगने वाला काम भी बड़ा फर्क ला सकता है। क्योंकि सफर में सीट के साथ-साथ सफाई का एहसास भी याद रह जाता है। घणी सच्ची बात है: दाग छिपेंगे नहीं, और गुणवत्ता का हिसाब और कड़ा होगा।
