राजस्थान विधानसभा की 75 साल की यात्रा, अब नई पहचान
जयपुर में राजस्थान विधानसभा के 75 साल का जश्न सिर्फ एक समारोह नहीं, एक संख्याओं वाली याद भी था। पहली बार निकली विधायी गौरव यात्रा ने विधानसभा को सड़क पर लाकर उसकी लोकतांत्रिक यात्रा को सार्वजनिक रूप में रखा। अध्यक्ष ने जो बात उठाई, वह सीधी थी: बहसों को ऑनलाइन डालना, ताकि कल के नेता उन्हें पढ़-सुनकर समझ सकें कि विचार कैसे टकराते हैं और कैसे निकलते हैं। यह विधानसभा को पाठशाला कहने वाली बात को व्यावहारिक बनाता है। ऊपर से, दलगत सीमाओं से परे सम्मान और मानवता का जो संकेत दिया गया, उसने आयोजन को सिर्फ औपचारिक नहीं रहने दिया। जयपुर के लिए यह याद दिलाने वाला पल था कि सरकारी इमारत कभी-कभी किताब भी होती है — बस उसके पन्ने खोलने की देर है। अगला डिजिटल अभिलेखागार का दौर कैसा दिखेगा?
