राजस्थान के बच्चे हाइजीन का माइक संभाल रहे
जयपुर में डेटॉल हाइजीन स्कूल पॉडकास्ट की शुरुआत ने एक सीधी सी बात को नया रंग दे दिया: बच्चे सिर्फ सुनने वाले नहीं, समझाने वाले भी बन सकते हैं। रेकिट की इस पहल में स्टूडेंट्स को हाइजीन और साफ-सफाई के सिंपल तरीके बोलने का मौका मिला, ताकि बात क्लासरूम से निकल कर घर और मोहल्ले तक जा सके। इसका सबसे अच्छा हिस्सा ये है कि बच्चों की बोली में हैवी लेक्चर नहीं होता। वो सीधा बोल देते हैं — हाथ धोना, साफ आदत रखना, और रोज के छोटे काम जो बड़ी सेहत बना देते हैं। यही वजह है कि पॉडकास्ट जैसी फॉर्मेट उनके लिए फिट बैठती है। जयपुर और राजस्थान के लिए ये एक प्यारा सिग्नल है: जब नई पीढ़ी माइक संभालती है, तो हाइजीन का संदेश भी ज़्यादा अपना-सा लगता है। स्कूल की दीवार से निकल कर जब आवाज़ कम्युनिटी तक जाती है, तब चेंज थोड़ा और सच्चा लगता है.
