राजस्थान की तिजोरी पर फिर सवाल, CAG ने घाटा पकड़ा
राजस्थान में पैसे का हिसाब सिर्फ दफ़्तर की फ़ाइल नहीं, रोज़ की ज़िंदगी का मुद्दा भी है। CAG की रिपोर्ट ने दिखाया कि अलग-अलग सरकारों के दौर में भी राज्य की माली हालत पर तनाव बना रहा, और घाटे की सीमा बार-बार पार हुई। इसका मतलब यह है कि कमाई और खर्च के बीच का फ़र्क अब भी चिंता बढ़ा रहा है। जयपुर से लेकर छोटे शहरों तक, लोग अक्सर यही पूछते हैं कि विकास के काम और बजट का संतुलन कैसे बैठेगा। रिपोर्ट का इशारा भी इसी तरफ है कि सिर्फ़ घोषणा से काम नहीं चलता, हिसाब भी साफ़ रहना चाहिए। एक सरकारी दफ़्तर के अंदर की सूखी फ़ाइल जैसी बात लगने वाली यह रिपोर्ट असल में घर के खर्च से जुड़ी हुई है। घणी सच्ची बात, तिजोरी का संतुलन ठीक रहे तो ही सपने भी टिकते हैं।
