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राजस्थान में नशा-विरोधी अभियान पर जोर

Rajasthan mein nasha-virodhi abhiyaan par zor

राजस्थान में नशा-विरोधी बात अब सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राज्यपाल ने जन-जागरूकता अभियान की बात करके एक सीधा संकेत दिया है कि यह मामला घर, स्कूल और मोहल्ला — तीनों जगह का है। जयपुर जैसे शहर में, जहां कॉलेज के बाहर से लेकर कॉलोनी की चौपाल तक हर जगह बच्चे और बड़े एक ही हवा में सांस लेते हैं, यह अभियान कागज पर नहीं, जमीन पर चलना जरूरी है। असल बात यह है कि नशे का असर सिर्फ एक आदमी तक नहीं रुकता; पूरे परिवार की दिनचर्या हिल जाती है। इसी लिए जागरूकता का मतलब भाषण नहीं, बल्कि सही समय पर सही बात, और सरल भाषा में समझाना है। स्कूल, पड़ोस और स्थानीय समूह मिलकर काम करें तो संदेश और तेज पहुंचेगा — जैसे कोई सीधी सी बात, जो देर से नहीं, वक्त पर सुन ली जाए। घणी सच्ची बात है: अभियान तभी काम करेगा जब वह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनेगा।