रज़ाई की गर्मी, शादी और घेवर का मौसम
जयपुर की ठंडी हवा पड़ते ही रज़ाई और शादी का हिसाब एक साथ खुल जाता है। सुबह घर से निकलने वाला आदमी भी दो मिनट और ओढ़ लेने का बहाना ढूँढ़ता है, और शाम होते-होते गलियों में बारात की तैयारी दिखने लगती है। इस मौसम में घेवर की दुकान पर सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है, क्योंकि रिश्तों में मिठास का मतलब यहीं से निकलता है। हलवाई के यहाँ चाँदी जैसे सफेद मावा, घी की खुशबू, और सुनहरे घेवर की तहें एक साथ चमकती हैं। घणी सर्दी में गरम चाय और घेवर का जोड़ा जयपुर को बिल्कुल अपना सा लगتا है। म्हारे यहाँ कह भी देते हैं—सर्दी हो या शादी, मिठाई का माहौल पक्का रहना चाहिए।
