रिटायर्ड अफसरों के अनुभव से राजस्थान को नया रास्ता
जयपुर में रिटायर्ड अधिकारियों से हुई बातचीत का केंद्र एक सीधी बात थी: सेवा से सेवानिवृत्ति हो सकती है, पर समाज के लिए जिम्मेदारी नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नीति तभी जमीन पर उतरती है जब सरकार और समाज के बीच लगातार संवाद बना रहे। इसी कारण अनुभव को केवल यादों में नहीं, नई पीढ़ी के मार्गदर्शन में काम आना चाहिए। बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े रिटायर्ड अधिकारियों ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने छात्रवृत्ति, निःशुल्क कोचिंग, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की बात को सराहा। साथ ही, गाँव तक पहुँचने वाली योजनाओं को और मजबूत करने पर जोर रहा। यह पूरा संवाद इस बात का संकेत था कि राजस्थान में शासन का मतलब सिर्फ फाइल चलाना नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई को समझना भी है। ऐसे में रिटायर्ड अधिकारियों की भूमिका मार्गदर्शक जैसी हो सकती है — घणी काम की चीज।
