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ग्रामीण रोज़गार का नया हिसाब, गाँव को मिलेगा नया सहारा

Rural rozgar ka naya hisaab, gaon ko milega naya sahara

राजस्थान में नई ग्रामीण रोज़गार योजना को लेकर ध्यान सीधे गाँव की ज़िंदगी पर है। राज्य-स्तरीय शुभारंभ के दौरान बताया गया कि पात्र परिवारों को 125 दिन का काम मिल सकता है, जिससे सिर्फ़ दैनिक मज़दूरी नहीं, बल्कि सड़क, पानी, मिट्टी-बाँध जैसे टिकाऊ काम भी तैयार हो सकते हैं। यह बात गाँव के लोगों के लिए खास है, क्योंकि काम सिर्फ़ पैसा नहीं, रोज़ का रूटीन भी संभालता है। इस योजना का दूसरा बड़ा बिंदु पारदर्शिता और जवाबदेही है। मतलब कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर हिसाब दिखना चाहिए। गाँव के लोग अक्सर यही कहते हैं कि काम हो, पर रिकॉर्ड साफ़ हो — बस इसी बात का भरोसा सबको चाहिए। अगर यह मॉडल ठीक से चला, तो पधारो गाँव की मेहनत को नया सहारा मिल सकता है, और रोज़गार का मतलब थोड़ा और पक्का हो सकता है।