सांगानेर के ब्लॉक-प्रिंट दुपट्टे बाज़ार में
सांगानेर में कपड़ा सिर्फ कपड़ा नहीं, रोज़ की मेहनत का रंग है। कारीगर लकड़ी के ब्लॉक पर बेल, फूल और छोटे पैटर्न उकेरते हैं, फिर उन्हें नील और अलिज़ारिन वाले घोल में डुबोकर रेशम या सूती कपड़े पर छापते हैं। सूखने के बाद दुपट्टा या थान सीधे जयपुर की कपड़ा गलियों में चला जाता है। बापू बाज़ार हो या त्रिपोलिया, दुकानदार उसे खोलकर देखते हैं, उंगली से छाप छूते हैं, और भाव लगाते हैं — घणी देर तक। यही बाज़ार की रूह है: कार्यशाला का पसीना, दुकान का हिसाब, और पहनने वाले की पसंद। सांगानेर के छाप इसी रास्ते से ज़िंदा रहते हैं, और हर नई खरीदारी उन्हें फिर से शहर का हिस्सा बना देती है।
