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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

सांगानेर की ब्लॉक-प्रिंट की खुशबू

Sanganer ke block-print ki khushboo

सांगानेर की तंग गली में सुबह से ही लकड़ी की थप-थप सुनाई देती है। कारीगर पहले नक्काशीदार ब्लॉकों को साफ करते हैं, फिर उनमें बेल, फूल और पत्तियों के नमूने जमाते हैं। कपड़ा लंबा फैला होता है, और नीली स्याही का रंग उस पर एक-एक छाप में उतरता है। घणी सफाई से काम होता है, वरना छपाई टेढ़ी हो जाए तो म्हारे बाज़ार का दिल भी नाराज़। धूप में सूखा हुआ यह सूती कपड़ा फिर जयपुर के जौहरी और बापू बाज़ार तक पहुँचता है, जहाँ लोग हाथ से बने काम की पहचान तुरंत कर लेते हैं। इसी मेहनत की महक सांगानेर को अलग बनाती है।