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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

सांगानेर के ब्लॉक प्रिंट: रोज़ पहनने वाली कला

Sanganer ke block prints: roz pehnne wali kala

सांगानेर के छोटे पारिवारिक कार्यशाला में कपड़ा पहले धोया जाता है, फिर सूखने के लिए टाँग दिया जाता है। उसके बाद कारीगर नक्काशीदार सागवान के ब्लॉकों से एक-एक छाप जमाता है, और डाबू मेज़ पर मिट्टी का रोक लगाने वाला लेप लगता है। इस प्रक्रिया में धैर्य भी चाहिए और साफ हाथ भी। यही कारण है कि सांगानेर के ब्लॉक-छपे सूती कपड़े जयपुर के बाज़ार में इतने पहने जाते हैं। वे हल्के लगते हैं, गर्मी में भी ठीक रहते हैं, और उनका रंग तेज़ नहीं लगता। घणी बार यह काम घर के बड़े-बुजुर्ग और जवान मिलकर करते हैं। सांगानेर की खास बात यही है: कला शोरूम में नहीं, गली के कोने में साँस लेती है.