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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

सांगानेर की छाप, रंग और लकड़ी का जादू

Sanganer ki chhap, rang aur lakdi ka jaadu

सांगानेर की हाथ-छपाई की गलियों में सुबह का शोर अलग ही होता है: कपड़ा फैलता है, रंग की थाली सजती है, और कारीगर लकड़ी के ठप्पे को सीधा रखकर पहली छाप लगाता है। यह काम देखने में सीधा लगता है, पर हाथ की पकड़ और आँख की सफाई दोनों चाहिए। यहाँ हर रंग का अपना मिज़ाज है—कोई गहरा लाल, कोई नीला, कोई मिट्टी-जैसा भूरा। छाप सूखकर दोबारा रंग माँगती है, तभी डिजाइन ज़िंदा लगता है। सांगानेर की पहचान भी यही है: धैर्य, सफाई और लगातार मेहनत। म्हारे जयपुर में ऐसे काम की खुशबू सिर्फ कपड़े में नहीं, पूरे मोहल्ले में रह जाती है।