संसद में 12 बिल, पर हंगामा ज़्यादा — हिसाब क्या है?
संसद का दृश्य इस बार सीधे नंबरों में बात कर रहा है। मॉनसून सत्र में 12 बिल पास हो गए, लेकिन चर्चा का काफी हिस्सा लगातार विरोध और नारेबाज़ी में निकल गया। इसी बात पर सरकारी पक्ष से कहा गया कि जो लोग संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूमते हैं, उन्हें सदन के चल रहे काम-काज का भी सम्मान करना चाहिए। दूसरी तरफ, गृह मंत्री ने आने वाली चर्चा में विस्तार से जवाब देने की बात कही, यानी अब ध्यान केवल शोर पर नहीं, रिकॉर्ड पर भी है। तिरंगा यात्रा को भी अच्छी भीड़ मिली, जिससे साफ है कि सरकारी संदेश ज़मीन पर असर दिखा रहा है। जयपुर से देखें तो यह पूरा दृश्य एक साधे हुए हिसाब जैसा लगता है: कितने बिल, कितना संवाद, और कितना समय रुकावट में गया। ऐसी राजनीति में असली सवाल संख्या का ही होता है।
