सचिवालय की रोशनी फिर गुल, ग्रिड का साया लम्बा
सचिवालय में बिजली का अचानक जाना बस एक टेक्निकल बात नहीं, पूरे सिस्टम की छोटी सी पर सच्ची तस्वीर बन गया। ग्रिड फेल्योर के कुछ दिन बाद जब फिर से पावर कट हुआ, तो ऑफिस के अंदर का सीन बदल गया — फैंस रुक गए, रोशनी कम हुई, और काम की रफ़्तार भी थोड़ी धीमी पड़ गई। ऐसे मौके पर बैकअप का नाम तो सब लेते हैं, पर असली टेस्ट तब होता है जब लाइन एक बार नहीं, दो बार हिल जाए। एक अफसर ने साइड में इतना ही कहा, प्लानिंग अच्छी हो तो अंधेरा इतना लम्बा नहीं लगता। ये बात सिर्फ सचिवालय की नहीं, पूरे शहर के लिए सिग्नल है — बिजली का भरोसा अब भी डेली रूटीन का सबसे बड़ा हिसाब है। घणी चमक वाली सरकारी इमारत में भी जब रोशनी चली जाए, तो समझ लो सिस्टम को थोड़ा और टाइट करने की ज़रूरत है।
