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सेक्रेटेरिएट में बिजली गई, सिस्टम ने फिर याद दिलाया

Secretariat mein bijli gayi, system ne phir yaad dilaya

सेक्रेटेरिएट में बिजली का कट आना वैसे तो रोज का ड्रामा नहीं होता, पर ग्रिड फेल्योर के कुछ दिन बाद जब रोशनी फिर गायब हुई, तो लोगों ने सीधा एक ही बात सोची — बैकअप का भरोसा कितना है। काम के बीच लिफ्ट रुक जाए, फैन धीमा पड़ जाए, और कंप्यूटर स्क्रीन एक पल को ब्लैंक हो जाए, तो समझ आता है कि पावर सिर्फ लाइन में नहीं, रूटीन में भी कितनी ज़रूरी है。 यहाँ असली बात आउटेज से ज़्यादा उस तैयारी की है जो हर बार टेस्ट हो जाती है। सेक्रेटेरिएट जैसे जगह पर छोटी सी बिजली कटना भी सिग्नल बन जाता है — कि सिस्टम चल रहा है, पर ज़रा सा झटका लगते ही उसकी कमज़ोरी दिख जाती है। एक स्टाफ मेंबर की सी सीधी बात याद आती है: जब लाइन जाए, तब बैकअप का नाम काफ़ी नहीं होता, उसका चलना ज़रूरी होता है। और जयपुर में, घणी गर्मी के बीच, यह बात और भी भारी लगती है।