एसएमएस हॉस्पिटल में निकासी पर बवाल
एसएमएस हॉस्पिटल से संविदा नर्सिंग स्टाफ को हटाने का फैसला आते ही माहौल बिगड़ गया। जो लोग वार्ड और नाइट ड्यूटी में हॉस्पिटल का सहारा बनते थे, उनके लिए यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं था, घर के चूल्हे का सवाल था। इसी बीच एक कर्मचारी की नौकरी छूटने के सदमे के बाद मौत की बात ने दर्द को और गहरा कर दिया. हॉस्पिटल के बाहर निकले फेलो स्टाफ का कहना था कि मामला बस एक ऑर्डर का नहीं, इंसाफ और सफाई का है। उनकी मांग थी कि पूरी जांच हो, और यह समझा जाए कि इतने बड़े सिस्टम में कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ पर फैसला किस तरह लिया गया। जयपुर में लोग भी यही बोल रहे थे—हॉस्पिटल की दीवार के अंदर जो खामोशी होती है, वह बाहर तक सुनाई दे रही थी. अब नजर इस पर है कि मामले को कैसे देखा जाता है: सिर्फ निकासी का नोट, या उसके पीछे का इंसानी असर। घणी बड़ी बात है, क्योंकि यहां सवाल एक वार्ड का नहीं, पूरे काम के सम्मान का है.
