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एसएमएस मेडिकल कॉलेज की खामोशी और एक गहरा सवाल

SMS Medical College ki khamoshi aur ek gehra sawal

एसएमएस मेडिकल कॉलेज में एक वरिष्ठ प्रोफेसर की मृत्यु ने परिसर की हवा को और भी भारी कर दिया। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग से जुड़ा यह मामला सिर्फ कॉलेज को नहीं, पूरे चिकित्सा जगत को सोच में डाल गया। रोज की कक्षाएँ, वार्ड ड्यूटी और परीक्षा का दबाव — इन सबके बीच ऐसे पल आते हैं जब अंदर का बोझ बाहर से दिखाई ही नहीं देता। परिसर के लोग बस इतना कह रहे थे कि काश कोई पहले रुककर पूछ लेता — सब ठीक तो है ना? यही वह सच है जो अक्सर बड़े तंत्र में छिप जाता है। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि डॉक्टर और प्रोफेसर होने के बाद भी इंसान को सुनने, समझने और संभालने की जरूरत उतनी ही रहती है। खामोशी कभी-कभी सबसे ज्यादा भारी होती है।