तिब्बी सिलबट्टा: जयपुर की किचन वाली याद
त्रिपोलिया बाज़ार के कोने में एक छोटी सी दुकान पर तिब्बी सिलबट्टा देखते ही म्हारे दिमाग में घर की रसोई चल पड़ी। पहले लाल मिर्च, धनिया, लहसुन और जीरा इसी पत्थर पर पीसकर चटनी बनती थी। हाथ से चलने वाली यह चीज़ बस बर्तन नहीं, एक आदत थी — धीरे काम, पर सही काम। आज मिक्सर आ गया, फिर भी कुछ घरों में सिलबट्टे का स्वाद अलग ही माना जाता है। दुकानदार ने बताया, जो सिलबट्टा 700 रुपये में गया, वह खास कटाई का था और एक पुराने हवेली घर ने लिया था। बस इस एक खरीद ने दिखा दिया: जयपुर की कुछ यादें बाज़ार में बेचने से खत्म नहीं होतीं, वे घर की छत तक पहुँच जाती हैं।
