टियर-2 और टियर-3 में लक्ज़री का नया हिसाब
लक्ज़री हॉस्पिटैलिटी का पैसा अब सिर्फ़ दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े बाज़ारों में नहीं टिक रहा। अब फोकस उन शहरों पर जा रहा है जहाँ लोग खरीदने की ताकत भी बढ़ रही है और ट्रैवल का फ्लो भी। टियर-2 और टियर-3 सिटीज़ में नए मॉल्स, बिज़नेस ट्रैवल, शादी-सीज़न बुकिंग्स और वीकेंड स्टेज़ मिलकर एक नया डिमांड बेस बना रहे हैं。 इसका मतलब सिंपल है: जो ब्रांड्स पहले सिर्फ़ ओवर-क्राउडेड मेट्रो में कॉम्पीट करते थे, अब वह कम भीड़ वाले, पर तेजी से बढ़ते शहरों में जगह बना रहे हैं। यहाँ लैंड कॉस्ट, कॉम्पिटिशन और कस्टमर मिक्स अलग होता है, इसलिए स्केल का फॉर्मूला भी अलग चलता है। एक इंडस्ट्री वॉचर की तरह देखो तो बात सिर्फ़ रूम्स की नहीं, पूरे सिटी-इकोनॉमी के मूड की है。 जयपुर, इंदौर, लखनऊ जैसे शहरों का एग्ज़ाम्पल लोग अक्सर देते हैं — मतलब, एस्पिरेशनल डिमांड अब पिन कोड के हिसाब से फैल रही है। और इसी बदलाव में लक्ज़री का नया मैप बन रहा है。
