त्रिपोलिया बाज़ार: लाख चूड़ियाँ और पीतल का रंग
त्रिपोलिया बाज़ार में सुबह की रोशनी पहले पीतल पर पड़ती है, फिर लाख की चूड़ियों के लाल, हरे और गुलाबी रंग और भी तेज़ लगते हैं। इधर छोटी दुकानों में छननी जैसी रफ़्तार से काम चलता है: एक तरफ़ कंगन, दूसरी तरफ़ थाल, लोटा और पूजा के पीतल के सामान। गली के मोड़ पर बैठी एक दुकानदार कहती है, “जो देखने आता है, वह खाली हाथ नहीं जाता।” यहीं 12 चूड़ियों का सेट सबसे ज़्यादा बिकता है, क्योंकि शादी, तीज और सावन के लिए लोग पूरा जोड़ा उठाना पसंद करते हैं। त्रिपोलिया बाज़ार का मज़ा सिर्फ़ खरीदारी नहीं, हाथ से छूकर देखने में है। घणी सच्ची बात: यह बाज़ार जयपुर की उन जगहों में से है जहाँ रंग और धातु दोनों साथ बोलते हैं।
