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बाज़ार के किस्सेBazaar Ke Kisse

त्रिपोलिया की लाख चूड़ियाँ: लखेरा हाथों का रंग

Tripolia ki lac bangles: Lakhera haathon ka rang

त्रिपोलिया बाज़ार में दुकान के सामने रखी छोटी सी अंगीठी, उस पर नरम लाख, और पास ही रंग-बिरंगे कंगन—यही लखेरा का काम है। पहले लाख को गरम करके पतली डोर बनाई जाती है, फिर हाथ से घुमा-घुमा कर उसमें रंग और चमक उतारी जाती है। जयपुर में यह काम सदियों से घर-घर की कारीगरी रहा है, और त्रिपोलिया उसका बड़ा ठिकाना। लखेरा समाज के लोग इसमें सिर्फ़ रोज़गार नहीं, अपनी पहचान भी गूँथते हैं। एक कंगन को पूरा करने में कई बार उँगली का ज़ोर, नज़र की पकड़, और घणी सब्र लगता है। बाज़ार में जो जोड़ी सबसे सस्ती लगती है, उसके पीछे भी म्हारे कारीगर का पूरा दिन छुपा होता है।

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