त्रिपोलिया की लाख चूड़ियाँ: लखेरा का हाथ
त्रिपोलिया बाज़ार में लाख चूड़ियों की दुकानें सिर्फ सामान नहीं, लखेरा समुदाय की पहचान भी हैं। गरम लाख को छोटी आग पर नरम करके, उसमें रंग मिलाया जाता है, फिर पतली छड़ पर घुमाकर चूड़ी बनाई जाती है। यह काम धीरे हाथ और पक्की नज़र माँगता है। यहीं से घणी पहचान बनती है: शादी, तीज, राखी या रोज़ के पहनावे के लिए अलग रंग और नाप। लखेरा घरों में यह हुनर पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आया है, इसलिए हर सेट में मेहनत के साथ याद भी होती है। त्रिपोलिया के ख़रीदार भी जानते हैं—कारख़ाने की चीज़ और हाथ की चीज़ में फ़र्क होता है। पधारो तो इस बाज़ार में चूड़ी की खनक खुद बता देती है कि काम कितना सच्ची लगन से हुआ है।
