वाजपेयी की सियासत: सिद्धांत, नरमी और अजातशत्रु
अटल बिहारी वाजपेयी का ज़िक्र आते ही सियासत का एक अलग रंग याद आता है — तीखी बात के बिना भी गहरी बात कर देना। जयपुर में हुए एक सम्मेलन में उन्हें अजातशत्रु के रूप में याद किया गया, मतलब ऐसा नेता जिसके लिए टकराव से ज़्यादा संवाद का महत्व था। बात सिर्फ इतनी नहीं थी कि वे विपक्ष में रहे या सत्ता में; ज़्यादा अहम यह था कि उनकी सोच में लगातार एक ही धारा बनी रही। इसी लिए उनका नाम आज भी अलग तरह से लिया जाता है — नरमी के साथ, पर पक्के सिद्धांतों के साथ। म्हारे शहर के लिए भी यह याद दिलाने वाली बात है कि राजनीति में शैली बदल सकती है, पर आदमी का मूल स्वभाव सबसे पहले दिखता है।
