वर्ड ऑफ द डे: अठवाड़ो
रसोई में थाली खाली होते-होते भी एक छोटा सच बच जाता है: थोड़ा-सा खाना, जो बाद में काम आता है. मारवाड़ी में उसे कहते हैं अठवाड़ो — यानी डिश में बचा हुआ फूड मटेरियल. गांव-ढाणी में ये शब्द सिर्फ बचत नहीं, घर की समझ भी दिखाता है. खाना फेंकना नहीं, संभालना. यूसेज सिंपल है: “थोड़ी सब्जी अठवाड़ो रह गयो, कल रोटी के साथ खा लेंगे.” ऐसे शब्द म्हारे रोज़ के काम की भाषा से आते हैं, इसलिए सुनते ही अपने लगते हैं. जयपुर की बोली में भी ये बात बड़ी प्यारी लगती है — कम शब्द, साफ मतलब, और पूरा घर उसमें दिख जाता है. सचची, भाषा भी कभी-कभी रसोई जैसी ही होती है.
