आरक्षण की पर्ची से बदलेगा जयपुर का सियासी गणित
जयपुर की राजनीतिक गलियों में इन दिनों एक ही बात घूम रही है—आरक्षण लॉटरी। चुनाव की घड़ी बिलकुल पास आते ही वार्ड और सीट का जो हिसाब महीनों से बन रहा था, वह अब एक नए मोड़ के सामने खड़ा है। यहाँ दिक्कत सिर्फ संख्या की नहीं, पूरे प्लान की है। कौन-सी सीट किस श्रेणी में जाएगी, इस पर कई लोगों ने अपनी तैयारी, बैठकें और ज़मीनी संपर्क सब जोड़ दिए थे। अब पर्ची खुलती है तो तस्वीर भी बदल सकती है। जो लोग कल तक अपनी सीट को पक्का मान रहे थे, उन्हें फिर से सोचना पड़ेगा। शहर की राजनीति का यही रंग है—एक छोटा-सा प्रशासनिक फैसला और पूरा माहौल हिल जाता है। गली-मोहल्ले में लोग भी कह रहे हैं, प्लान A फेल हुआ तो प्लान B का जुगाड़ तैयार रखना पड़ता है। इसलिए अब सबकी नज़र उसी अंतिम ड्रॉ पर है, जो अगले कुछ दिनों की सियासी दिशा तय करेगा.
