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कॉमिक कविComic Kavi

बापू बाजार का मोलभाव थिएटर

Bapu Bazaar ka bargain theatre

बापू बाजार में खरीदारी कब खरीद-फरोख्त से ज़्यादा नाटक बन जाती है, पता ही नहीं चलता। पहले दुकानदार बोलता है, 'घणी सस्ती है', फिर ग्राहक कहता है, 'और कम करो'। एक दुपट्टा देखने आया आदमी, थोड़ी देर में थैला, दीवार सज्जा और झुमके तक पकड़ लेता है। यह जयपुर का पुराना खेल है — एक चीज़ के बहाने बाजार में घुसना, और दो अतिरिक्त चीज़ों को 'ज़रूरत' बोलकर घर ले आना। बापू बाजार की यही मस्ती है: दाम पर लड़ाई, और खुशी पर कब्ज़ा। सच्ची, यहाँ मोलभाव सिर्फ पैसों का नहीं, जोश का भी होता है।