जौहरी बाजार के लाख के कंगन और सब्र की सौदा
जौहरी बाजार में लाख के कंगन खरीदना खरीदारी से ज़्यादा एक सौदा-बाज़ी होती है। रंग, नाप, और “यह हाथ पर बिलकुल ठीक बैठेगी” वाली बात पर परिवार की तीन अलग राय निकल आती है। और दुकानदार? भाईसाब, वह तो घणी धीरज से कहता है: पहले यह नाप देखो, फिर दिल।



















