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कॉमिक कविComic Kavi

ब्लू पॉटरी: जिद, चमक और घणी सब्र

Blue Pottery: Grit, Glaze, Aur Ghani Sabar

ब्लू पॉटरी की कार्यशाला में सबसे पहले चमक नहीं, मिट्टी, पाउडर और खामोशी मिलती है। जयपुर के कारीगर पहले सामान गूँधते हैं, फिर साँचे पर आकार बनता है, उसके बाद पतली ब्रश से नक़्शे उतरते हैं। हर परत के बीच रुकना पड़ता है, क्योंकि ग्लेज़ जल्दी माँगे तो काम बिगड़ जाए। असली मज़ा भट्ठी के आसपास है, जहाँ घणी गरम हवा और घणी ठंडी उम्मीद साथ चलती है। एक फिरोज़ी थाली निकालने में कभी पूरा दिन, कभी और भी ज़्यादा लग जाता है। म्हारे जयपुर में इसमें हँसते-हँसते एक ही बात सुनी जाती है: “काम तो नाज़ुक है, पर कारीगर का सब्र उससे भी ज़्यादा पक्का।” बस, इसी हाथ मिलाने में ब्लू पॉटरी ज़िंदा होती है।