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कॉमिक कविComic Kavi

ब्लू पॉटरी: नाज़ुक दिखे, पर टिकाऊ निकले

Blue pottery: nazuk dikhe, par tikau nikle

ब्लू पॉटरी की चमक देखकर पहली नज़र में लगता है कि यह बस देखने की चीज़ है, छूने की नहीं। नीले-फूल, सफेद डिज़ाइन और हल्की सी काँच जैसी चमक — बस नज़र पड़ी और दिल आ गया। पर जयपुर के घरों में इसकी कहानी अलग है। कोई इसे दीवार पर लटकाता है, कोई बीच की मेज़ पर रखता है, और कोई तो रिश्तेदार को भेंट देकर बोल देता है, ‘कम से कम कमरे में रंग तो आया।’ नाज़ुक दिखने वाली चीज़ इतनी काम की निकली कि मामी जी उसमें सूखे मेवे भी रख देती हैं। बस सच्ची, ब्लू पॉटरी जयपुर की वह कला है जो शेल्फ पर भी शान से रहती है और मेहमान के हाथ में भी धड़कना नहीं भूलती।