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चारपाई: जयपुर के हर घर की पहली सीट

Charpai: Jaipur ke har ghar ki pehli seat

पहले चारपाई को लोग सिर्फ सोने की काम की चीज समझते थे, पर जयपुर के पुराने घरों में यह घर का माहौल तय करती है। धूप तेज हो तो इस पर तकिया टिक जाता है, शाम को बच्चे इसी पर खेलते हैं, और मेहमान आए तो बात यहीं से शुरू होती है। गली के कोने पर रखी चारपाई बताती है कि घर खुला है, और घर वाले भी। म्हारे यहाँ तो कई बार छत की दीवार के पास चारपाई का होना इतना सामान्य है जैसे कुल्हड़ में चाय। नया सोफा-सेट वाला दौर आया, पर चारपाई ने अपनी जगह नहीं छोड़ी। क्योंकि जयपुर में सुकून आज भी थोड़ा धागे, लकड़ी और हवा में मिलता है।