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कॉमिक कविComic Kavi

चोखी ढाणी का थाल और सब्र का टेस्ट

Chokhi Dhani ka thaal aur sabr ka test

चोखी ढाणी में थाल देखकर लगता है, घणी भूख का इलाज मिल गया। पहला पापड़ आते ही हाथ बढ़ता है, और दूसरे में गायब। फिर गट्टे की सब्ज़ी, केर-सांगरी, चूरमा और छाछ का सिलसिला शुरू होता है, जैसे थाल नहीं, जयपुर की रसोई की परेड हो। पर असली मज़ा तो वेटर के चेहरे पर है — वह बिना जल्दी के प्लेट बदलता जाता है, और उसकी मुस्कान कह देती है: पड़ोसी के घर से भी ज़्यादा लंबा काम यही है। चोखी ढाणी का थाल पेट से पहले सब्र को भर देता है। और सच्ची बात, इतनी बार दोबारा भरते देखकर म्हारे जैसा सीधा आदमी भी बोल दे: “बस, एक और पापड़, बाकी कल.”