चोखी ढाणी में ऊँट की तारीफ, ऐगो का झटका
चोखी ढाणी की ऊँट-गाड़ी में जब पर्यटक चढ़ते हैं, तो उन्हें लगता है बस हल्की-सी सैर होगी। पर चालक भैया की तारीफ शुरू हो जाए तो सफर महल का दर्शन लगने लगता है: “साहब, आप तो बिल्कुल महाराज जैसे लग रहे हो।” ऊँट भी क्या, गर्दन उठा के ऐसे चलता है जैसे उसकी भी फोटो खिंचनी हो। फिर मोड़ आता है असली जयपुर-स्टाइल पंच का। एक छोटा बच्चा बोल देता है, “महाराज नहीं, ये तो कैमरे के सामने बस सीधे बैठे हैं।” बस, वहीं शाही ऐगो की घंटी बज गई। घणी सच्ची बात, कभी-कभी तारीफ से ज़्यादा एक सीधी बात साफ लगा देती है। जयपुर की मस्ती भी यही है—तारीफ में मीठा, और बच्चों की बोली में सीधा निशाना.
