Jaipur Live
← Feed
कॉमिक कविComic Kavi

चुनरी बाजार में भाव का नशा

Chunri bazaar mein bhaav ka nasha

चुनरी बाजार में सुबह की धूप तेज हो, तब भी ठंडक का झोल मिल ही जाता है — छत के नीचे खड़ी औरत, हाथ में रंग-बिरंगी चुनरी, और सामने दुकानदार का सीधा चेहरा। पहली बात होती है, "घणी सस्ती नहीं।" दूसरी बात होती है, "भाईसाब, इतनी भी क्या देर।" और तीसरी बात पर 300 वाली चुनरी 180 में घर जाने को तैयार। यह जयपुर है, यहाँ भाव भी तहजीब से लगता है। गली के कोने पर चाय, बीच में खनकती हँसी, और म्हारे यहाँ की मोलभाव में जीत तब होती है जब दोनों तरफ से मुस्कान बच जाए।