घोड़े की चमक, जयपुर की शान
जयपुर के घरों में चाँदी का घोड़ा देखते ही एक अलग ही एहसास आता है। यह सिर्फ पानी रखने का बर्तन नहीं, घर की सँभाल और शादी-समारोह की पहचान भी है। पुराने मोहल्लों में इसे ठंडी चाँदी जैसी चमक के साथ सफेद कपड़े पर रखा जाता है, और मेहमान आते ही नज़र वहीं टिक जाती है। इसका रुतबा इसलिए भी बना रहता है क्योंकि घोड़ा रोज़ का काम और याद दोनों सँभालता है। पानी ठंडा रहे, हाथ में पकड़ने पर भार महसूस हो, और घर में अपनापन दिखे — बस, इतना काफ़ी है। म्हारे यहाँ घोड़ा कभी सीधे प्याले से बड़ा लगता है, कभी दुलहन के सामान के पास। और सच्ची, जयपुर में चमक से ज़्यादा याद उस चीज़ की होती है जो काम भी करे और शान भी दे।
