गोलचा के इंटरवल में असली शो
गोलचा जैसे पुराने सिनेमा घर में इंटरवल सिर्फ विराम नहीं होता, वह पूरा माहौल होता है। स्क्रीन पर फिल्म थोड़ी देर को थमी, और नीचे नाश्ता काउंटर पर ज़िंदगी तेज़ी से चलने लगती है। समोसे की खुशबू, ठंडी पेय की बोतल, और टिकट फाड़ कर आई भीड़—सब एक साथ घुल जाते हैं। जयपुर में कई लोग फिल्म से ज़्यादा इस बीच के दृश्य को याद रखते हैं, सच्ची। म्हारे यहाँ लाइन में खड़े लोग भी एक अलग ही दुनिया बन जाते हैं: कोई दाम पूछ रहा, कोई अतिरिक्त हरी मिर्च माँग रहा, कोई बच्चे के हाथ से समोसा बचा रहा। गोलचा का इंटरवल इसी का नाम है—फिल्म के साथ छोटी सी मोहब्बत, और नाश्ता काउंटर के साथ बड़ा सा रिश्ता।
